मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की साठवीं पुण्यतिथि मनाई
भीलवाड़ा हलचल प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा की साठवी पुण्यतिथि आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाई गई | हरनी महादेव रोड स्थित संस्था के सेवाकेंद्र के सभागार में लगभग 200 श्रद्धालु उपस्थित थे | संगठित रूप में राजयोग का अभ्यास करके वातावरण में शांति के प्रकम्पन्न फैलाए एवं मातेश्वरी की फोटो पर पुष्पांजलि कर मातेश्वरी जी को श्रद्धांजलि दी गई|
ब्रह्माकुमारी तरुणा बहन ने मातेश्वरी जी की जीवनी सुनाते हुए कहा कि इनका जन्म 1919 अमृतसर में एक सामान्य परिवार में हुआ था | वे 1936 में अविभाजित भारत के सिंध हैदराबाद में ब्रह्माकुमारी संस्था के संपर्क में आई तथा पिता श्री ब्रह्मा बाबा के जीवन और संस्था की शिक्षाओं से प्रभावित होकर पूर्ण रूप से समर्पित हो गयी | बचपन का नाम ओम राधे था | जब यह ओम की ध्वनि उच्चारण करती थी तो वातावरण में गहन शांति छा जाती थी इसलिए इनको ओम राधे के नाम से पुकारा जाने लगा | मातेश्वरी जी ने 24 जून 1965 को अपने नश्वर देह का त्याग करके संपूर्णता को प्राप्त किया | इस दिवस को ब्रह्माकुमारी संस्थान के देश-विदेश के भाई-बहन आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाते हैं | ब्रह्माकुमारी इंदिरा दीदी ने मातेश्वरी जी के चरित्र सुनाते हुए कहा कि मातेश्वरी का व्यक्तित्व समस्त नारी जगत के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत है | मातेश्वरी जी नें आध्यात्मिक शक्ति के द्वारा मानवता की सेवा के पथ को उस समय चुना जब नारियों को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती थी | भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए मातेश्वरी जी का त्याग समर्पण और सेवा समस्त भारत तथा विश्व के लिए अत्यंत गौरव का विषय है | मातेश्वरी जी के दिखाए हुए मार्ग पर चलना ही मातेश्वरी जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा महिला जिला अध्यक्ष मंजू पालीवाल ने भी अपनी शुभकामनाएँ दी | इसके अतिरिक्त ब्रह्माकुमारी तारा बहन ने एवं नीतू बहन ने भी मातेश्वरी की विशेषता पर प्रकाश डाला |