खेल और व्यवस्था में चितौड़गढ़ बना राष्ट्रीय मिसाल

Update: 2026-01-10 08:00 GMT

चितौड़गढ़। 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयी हैंडबॉल प्रतियोगिता (अंडर-14 बालक-बालिका) राजस्थान के खेल इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। चितौड़गढ़ में आयोजित इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में राजस्थान ने पहली बार छात्र और छात्रा दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर ऐतिहासिक दोहरी उपलब्धि दर्ज की।

खेल मैदान पर इस स्वर्णिम सफलता के साथ-साथ आयोजन की व्यवस्था, समन्वय और आत्मीय मेजबानी ने भी राष्ट्रीय स्तर पर चितौड़गढ़ को विशिष्ट पहचान दिलाई।

इतिहास रचता दोहरा स्वर्ण

राजस्थान की दोनों टीमों ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासित और आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए फाइनल मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज की। यह दोहरा स्वर्ण पदक प्रदेश की खेल नीति, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और खिलाड़ियों की मेहनत की झलक थी।

SGFI फीडबैक में “उत्कृष्ट” मेजबानी

देशभर से आई टीमों, प्रशिक्षकों और अधिकारियों ने स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित ओपिनियन फॉर्मेट में स्वागत, आवास, परिवहन, भोजन व्यवस्था, मैदान एवं तकनीकी संचालन जैसे अधिकांश बिंदुओं को “उत्कृष्ट” श्रेणी में आंका।प्रतियोगिता में शामिल अधिकांश प्रतिभागियों की एक-सी राय रही कि यह केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राजस्थान की आत्मीय मेजबानी का अविस्मरणीय अनुभव था।

कॉर्डिनेशन कमेटी : स्वागत से ही छोड़ी अमिट छाप

शारीरिक शिक्षक चंद्रकांत शर्मा एवं सहप्रभारी तेजपाल जणवा के नेतृत्व में गठित कॉर्डिनेशन कमेटी ने रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर ही राजस्थानी संस्कृति के अनुरूप उपराणा पहनाकर टीमों का आत्मीय स्वागत किया। टीमों को निर्धारित आवास स्थलों तक जिम्मेदारीपूर्वक पहुंचाया गया, जिससे शुरुआत से ही सकारात्मक माहौल बना।

परिवहन व्यवस्था : समयबद्धता बनी पहचान

वाहन व्यवस्था प्रभारी अभिषेक चाष्टा,सहप्रभारी शंभुलाल जाट एवं उनके सहयोगियों द्वारा संचालित परिवहन तंत्र देर रात एवं अल सुबह पहुंचने वाली टीमों के लिए भी समान रूप से प्रभावी रहा। सभी टीमों को उनके गंतव्य आवास स्थल तक पहुंचने में इस टीम ने बिना समय देखे अपनी जिम्मेदारी को तत्परता से पूर्ण किया। आवास से खेल मैदान तक पूर्वनिर्धारित समय-सारिणी के अनुसार नियमित वाहन सुविधा उपलब्ध कराई गई।

आवास व्यवस्था : भारी ठंड में भी माकूल व्यवस्था

छात्र वर्ग के आवास प्रभारी भगवान लाल सुथार, सह प्रभारी दिलीप जैन तथा छात्रा वर्ग की प्रभारी चंदा झाड़ोलिया, सह प्रभारी देवकीनन्दन वैष्णव एवं टीम सदस्यों के समन्वय से सात दिनों तक सुव्यवस्थित आवास व्यवस्था रही। ठंड के बावजूद गरम पानी, स्वच्छ कमरे, पर्याप्त बिस्तर एवं साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था ने खिलाड़ियों और कोचों को राहत दी।

मैदान, मैस और तकनीकी संचालन भी कसौटी पर खरे

खेल मैदानों की गुणवत्ता, सुरक्षा एवं चिकित्सा प्रबंध, SGFI मानकों के अनुरूप मैस व्यवस्था तथा निष्पक्ष एवं तकनीकी रूप से सुदृढ़ अंपायरिंग को लेकर भी टीमों ने संतोष व्यक्त किया।

मेजबानी की यादें बनी पहचान

खेल उपलब्धियों और उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के चलते चितौड़गढ़ की यह मेजबानी राजस्थान की प्रशासनिक दक्षता, शैक्षिक-खेल समुदाय की सक्रिय भागीदारी और स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता बनकर उभरी।

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